रीतिकाल पूर्वपीठिका 'रीतिकाल' का नामकरण विभिन्न विद्वानों के अनुसार निम्न है- नाम प्रस्तोता रीतिकाव्य डॉ० जार्ज ग्रियर्सन अलंकृत काल मिश्र बन्धु (श्यामबिहारी, सुखदेव बिहारी, गणेश बिहारी) रीतिकाल आचार्य रामचन्द्र शुक्ल श्रृंगारकाल आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र कला काल डॉ० रमाशंकर शुक्ल अन्धकार काल त्रिलोचन रीतिकाल के प्रवर्तक के सम्बन्ध में विद्वानों में मतभेद है जो निम्न है- इतिहास प्रवर्तक रचनाकाल प्रस्तोता कारण कृपाराम 1541 ई० कालक्रम की दृष्टि केशवदास 1555-1617 ई० डॉ० नगेन्द्र रचनाकार-व्यक्तित्व की समृद्धि की दृष्टि से चिन्तामणि 1643 ई० रामचन्द्र शुक्ल अखण्ड परमपरा चलाने की दृष्टि से आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने 'हिन्दी साहित्य का अतीत में रीतिकाल का विभाजन निम्न ढंग से किया है- रीतिकाल (श्रृंगार काल) रीतिबद्ध धारा रीतिमुक्त या स्वच्छंद काव्यधारा लक्षण बद्ध काव्य लक्ष्यमात्र काव्य रहस्योन्मुख काव्य शुद्ध प्रेम काव्य आचार्य विश्वनाथ मिश्र ने 'श्रृंगार काल' को तीन भागों में बाँटा है- (1) रीतिबद्ध-रचना लक्षणों और उदाहरणों से युक्त होती है। (2) रीति सिद्ध-रीति की ब...
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