Part-1 हिंदी भाषा एवं साहित्य का वास्तुंनिस्ट इतिहास बाय सरस्वती पांडे गोविंद पांडे बुक इन हिंदी (बुक, सरस्वती पांडे गोविंद पांडे)
दो शब्द साहित्य एवं भाषा का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है। शब्द एवं अर्थ के सहभाव को साहित्य कहते हैं। साहित्य सृजनशील एवं रचनात्मक प्रक्रिया है जबकि भाषा सृजनशील एवं रचनात्मक प्रक्रिया की अभिव्यक्ति का साधन है। आचार्य भर्तहरि का कथन है कि भाषा ज्ञान को प्रकाशित करती है- "वाग्रूपता चेन्निष्क्रामेदवबोधस्य शाश्वती। न प्रकाशः प्रकाशेत साहि प्रत्यवमशिनी।।" साहित्य ज्ञान का संचित कोश होता है और भाषा ज्ञान संचयन का माध्यम। साहित्य एवं भाषा के हजार वर्षों के इतिहास के तथ्यात्मक अध्ययन की यात्रा काफी दिलचस्प है। इतिहास लेखन कठिन एवं श्रमसाध्य प्रक्रिया है। वस्तुनिष्ठता एवं प्रामाणिकता इसकी अनिवार्य शर्त है। इतिहास में बिना तथ्यों को निर्गत किये विचारों एवं सिद्धान्तों की लकीर खींचना सर्वथा कठिन है। वस्तुतः साहित्य एवं भाषा का इतिहास भी इन्हीं कठिनाइयों से विकसित हुआ है। हिन्दी साहित्य के इतिहास सम्बन्धी तथ्यों की प्रामाणिकता के सन्दर्भ में हमने अपनी प्रथम पुस्तक 'हिन्दी साहित्य: एक वस्तुनिष्ठ इतिहास' की भूमिका में संक्षेप में चर्चा की है। जिसका उल्लेख करना यहाँ समीचीन प्रतीत हो र...