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Part-7 हिंदी भाषा एवं साहित्य का वास्तुंनिस्ट इतिहास बाय सरस्वती पांडे गोविंद पांडे बुक इन हिंदी (बुक, सरस्वती पांडे गोविंद पांडे)

गद्य हिन्दी गद्य का विकास अद्योतन सूरी ने 778 ई० में 'कुवलय माला' नामक एक गद्य कृति की रचना की। 10वीं-11वीं शताब्दी के आस-पास रोडा कवि ने 'राउलवेल' नामक एक ग्रन्थ की रचना की। राउलवेल' गद्य-पद्य मिश्रित चम्पू काव्य की प्राचीनतम हिन्दी कृति है। राउलवेल एक शिलांकित कृति है। हिन्दी साहित्य में नख-शिख वर्णन की श्रृंगार-परम्परा का आरम्भ 'राउलवेल' से माना जाता है। राउलवेल' में हिन्दी की सात बोलियों के शब्द मिलते हैं जिनमें राजस्थानी प्रधान है। 'उक्ति व्यक्ति प्रकरण' हिन्दी का प्रथम गद्य का ग्रन्थ है। 'उक्ति व्यक्ति प्रकरण' की रचना महाराज गोविन्दचन्द्र के सभा पण्डित दामोदर शर्मा ने 12वीं शताब्दी के आसपास किया। 'उक्तिव्यक्ति प्रकरण' एक व्याकरण ग्रन्थ है। डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी और डॉ० मोतीचन्द्र ने 'उक्ति व्यक्ति प्रकरण' को एक अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना है। 'वर्ण रत्नाकर' मैथिल कवि ज्योतिश्वर ठाकुर की रचना है। 'वर्ण रत्लाकर' मैथिली हिन्दी में रचित गद्य की प्रथम रचना है। वर्ण रलाकर' का ढाँचा विश्वकोशात्मक है...

Part-6 हिंदी भाषा एवं साहित्य का वास्तुंनिस्ट इतिहास बाय सरस्वती पांडे गोविंद पांडे बुक इन हिंदी (बुक, सरस्वती पांडे गोविंद पांडे)

आधुनिक काल भारतेन्दु युग (पुनर्जागरणकाल) हिन्दी साहित्य में 'आधुनिक काल' नाम सर्वप्रथम आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा दिया गया था। 'रेनेसौं' (नवजागरण या पुनर्जागरण) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम प्रसिद्ध फ्रांसीसी इतिहासकार मिशेसेंट ने 19वीं सदी के पूर्वार्ड में किया था। कुछ आलोचकों ने 'नवजागरण' और 'पुनर्जागरण' में शाब्दिक भेद करते हुए भक्तिकाल को 'नय जागरण' तथा १९वीं सदी से आरम्भ होने वाले जागरण को 'पुनर्जागरण' कहा है। डॉ० राम विलास शर्मा ने 'हिन्दी नवजागरण' के दो हिस्से किये हैं- (१) लोक जागरण (भक्ति आन्दोलन) आधुनिक काल (२) नवजाग्रण (हिन्दी नवजागरण या आधुनिककाल) डॉ० रामविलास शर्मा ने 'लोक जागरण' तथा 'नवजागरण' में निम्नलिखित ढंग स अन्तर व्यक्त किया है- लोकजागरण प्रथम जातीय निर्माण को व्यक्त करने वाला सांस्कृतिक आन्दोलन है, जिसका मुख्य स्वर सामन्त विरोधी तथा मानवतावादी है। भक्ति आन्दोलन का काव्य हो 'लोक जागरण' का काव्य है। नवजागरण या हिन्दी नवजागरण राष्ट्रीय स्वाधीनता का सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक आन्दोलन ...