रिश्ते तोड़ना आसान है बनाए रखना मुश्किल।

फिर....अंत तो कुछ नहीं पर .....बस जो बातें हुई है वो यादें बन जाती ही फिर इंसान उन यादों में रहता है ना जाने तुम कैसे सोच लेते हो कि तुरंत कोई इंसान किसी और को देखने लगेगा कैसे कोई पिछली याद से निकल सकता है थोड़ा तो......बनता है कि सोचे ये क्यों किया कुदरत से कैसे किसी को इतने करीब लाया और फिर उसे दूर किया क्या सिर्फ उसी की गलती है या हमारी भी है गलती=... अगर हमें किसी एक की गलती लगती है जो कि समाने वाले की ही लगती है तो क्या ये सही है नहीं.....दूर खड़े हो के अपने ख्यालों में अपनी यादों में हमे खुद को भी देखना चाहिए समझना चाहिए कि इस जगह से हमें भागना आसान लगता है तो इसका मतलब कोई भी कभी भी तुम्हे तुमसे तो नहीं मिलेगा शायद मिल भी जाए तो तुम्हे खुदने ही हजार खामियां दिखेगी क्यों कि हम है ही ऐसे बस अपनी गलती छुपाने के लिए दूसरों में खोट ढूंढा करते है जानते नहीं कि हमें खुद को भी जरा बदलना होगा क्यूं कि हम खुद भी तो ठीक नहीं हैं कितने भी लोग दुनिया में हो क्या किसी की विचारधारा किसी से 100% मेल खा सकती है क्या .... क्या हो कि हम एक जैसा सोचे क्या हो कि साथ उठे साथ खाए खाना भी एक जैसा पसंद हो क्या हो कपड़ों का कलर भी परफ्यूम भी सेम ही पसंद आए पर ये नहीं लगता कि हम फिर एक दूसरे से बोर हो जाएंगे......🙂‍↕️ हमारी प्रवृत्ति ही बोर होने वाली है सवाल करने वाली..... पर मैंने ये समझा है कि जबसे हम बड़े हुए है लोगो का बचपना चला गया है मासूमियत खत्म हो गई है जिंदगी में आए 4 लोगों की हरकते देख के एक जगह सालों सालों रह के बाकी दुनिया भी वैसे ही 4 लोगों जैसी है सोचने लगे है वक्त के साथ एक सोच को दिमाग में रख कर पके घड़े हो गए है.... और उसके बाद हमने बस सोच लिया है कि यही अंतिम सत्य है अब इससे बाहर दुनिया नहीं है हम ही सही है बाकी सब गलत कुछ नई चीज कोई नई सोच किसी का नया व्यवहार हमें आशंकित करता है हम यकीन नहीं कर पाते उस बात को बर्दाश्त नहीं कर पाते और समझने की जगह बस उसे गंदे शब्दों के ढाल कर सामने वाले पे वार करते है ताकि वो चुप हो जाए पर क्या हमे इस चीज की जरूरत है क्या शांति से बिना किसी की भावना आहट किए बिना हम चल सकते है। बस अपने अहम के चक्कर में हम दबते जा रहें हैं पर क्या इस युवा अवस्था के बाद हमे कोई देखने वाला होगा जो हमें सच्चे दिल से चाहिए हमारी अच्छा बुराई के साथ हमारे साथ रहें या फिर हमारे अच्छे बुरे समय में साथ खड़ा हो या फिर ढकता शरीर और पके बाल में भी उतना ही मोहक लगे जितना अपनी यौन अवस्था में लगता था.... लगता तो यही है मुझे कि हां मैं किसी एक को दे सकती हूं इतना प्यार सम्मान की वो फुके न समय और ये बोल सकती हूं कि बहुत सारा है दिल में वो भाव पर किसी एक के लिए ही.....ये नहीं की बांटेगा तो खत्म होगा पर ये कि बाता नहीं जा सकता ये बांटने वाली चीज नहीं ।।।। तो क्यूं न चहुं की मेरे हिस्से का प्यार दुलार कही और जाए ...ये तो स्वाभाविक हैं न प्योर कैसे रहेगा वो भाव जब वो जूठा हो जाए....जैसे किसी चीज को कोई और छू ले तो वो जूठा कहलाता है वैसे ही तो .......... ये सब तो यूं ही लिख दिया बस ख्याल तो बहुत कुछ आता है....ख्याल का कौन सा cloud storage है जो भर जाए या hang हो जाए या लाईट चली जाए या फिर server heat कर जाए ये तो सहज परवाह है बस खाली फोकट टाईम में आती ही रहती हैं........

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