मेरे बचपन का डर/ख्याल/सपने/हरकते इत्यादि

मरने के ख्याल पर आपका क्या ख्याल है। मैं तो ये सोचती थी की, मैं मर जाऊ कोई बात नही पर मुझे दर्द न हो। कोई ऐसा तरीका हो की मेरी रूह आराम से निकल जाए और मैं जन्नत में चली जाऊ, गुनाह तो मैं ने किए ही नही पक्का मैं जन्नत में जाऊंगी।

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